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राष्ट्रपति
‌‌‌‌President

राष्ट्रपति भारत का राज्य प्रमुख होता है।
राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक है।
संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार कोई व्यक्ति राष्ट्रपति होने के योग्य तब होगा ज वह---
राष्ट्रपति पद की योग्यता
भारत का नागरिक हो
35 र्व की आयु पूरी कर चुका हो।
लोकसभा का सदस्य निवांचित किये जाने योग्य हो।
राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष निर्वाचन द्धारा किया जाता हैं।
राष्ट्रपति के उम्मीदवार अपना नांमाकन करते समय 15000 रुपये की धनराशि निर्वाचन अधिकारी के समक्ष जमा करे।
नामांकन पत्र का प्रस्ताव कम से कम 50 मतदाताओं द्वारा किया जाना चाहिए।
अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचन मण्डल द्धारा किया जाएगा। जिसमें संसद के दोनो सदन तथा राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होगा।
71 वें संविधान सशोधन द्वारा यह व्यवस्था कर दी गयी है कि दो संध क्षेत्रों तथा पण्डिचेरी तथा राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र ​दिल्ली की विधानसभओं के सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल किया गया।
1957 में जब राष्ट्रपति का चुनाव किया गया तो निर्वाचक मण्डल में कुछ स्थान खाली थे।
1961 में 11 वॉ संविधान सशोधन के तहत यह व्यवस्था दी गयी कि निर्वाचक मण्डल में स्थान खाली रहने पर भी राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।
1977 में श्री नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध चुने गये थें।
राज्यविधान सभाओं के सदस्य अपने-अपने राज्यों की राजधानीयों में मतदान करते हैं।
संसद सदस्य ​दिल्ली या अपने राज्य की राजधानी में मतदान करते है।
संविधान के अनुच्छेद 62 में केवल यह अपेक्षा की गई है कि राष्ट्रपति का चुनाव निधारित समय के अदंर सपंन्न करा लिया जाना चाहिए।
अनुच्छेद 71 के अनुसार राष्ट्रपति के चुनाव सें सम्बधित विवाद का विनिश्चय उच्चतम न्यायालय द्धारा किया जाता हैं।
अनुच्छेद 57 के अनुसार भारत के राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है।
अनुच्छेद 70 के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश या उसकी अनुपस्थिति में उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठम न्यायाधीश के समक्ष अपने पद के कार्यकाल की शपथ लेता है।
अनुच्छेद 56 के अनुसार राष्ट्रपति अपने पदग्रहण की तिथि से 5 वर्ष की समय तक और उसे 5 वर्ष की समय के पूर्व संविधान के उल्लघन के लिए संसद द्वारा लगाये गये महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है।
अनुच्छेद 59 के अनुसार राष्ट्रपति की उपलधिंया और भत्ते उसके कार्यकाल में घटाये नहीं जा सकता है।
अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग की प्रकिया द्धारा हटाया जा सकता हैं।
राष्ट्रपति के विरूद्ध महाभियोग लगाने का संकल्प ससद के किसी भी सदंन में पेश किया जा सकता है।
सदंन में महाभियोग का सकंल्प पेश किया जाना है तो उसके एक चौथाई सदस्यों द्धारा हस्ताक्षरित आरोप पत्र राष्ट्रपति को 14 ​ दिन पूर्व ​ दिया जाना आवश्यक है।
राष्ट्रपति को आरोप पत्र ​दिये जाने के 14 ​दिन के बाद ही सदंन में महाभियोग का सकंल्प पेश किया जा सकता है।
अनुच्छेद 73 के अनुसार संघ की कार्यपालिका क्ति राष्ट्रपति में निहित है और वह अपनी शक्ति का प्रयोग अपने अधीनस्थ प्राधिकारियो के माध्यम से करता है।
राष्ट्रपति की कार्यपालिका रक्तियों को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति संध कार्यपालिका क्ति के सचांलन में सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का गठन करता है।
मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है।
राष्ट्रपति ने अपने विशेषाधिकार के प्रयोग में राष्ट्रपति ने 1979 में चरण सिंह को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया था।
संविधान द्धारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गयी है कि वह संध से सम्बन्धित महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियॉ करें
राष्ट्रपति महान्यायवादी की नियुक्त करता है।
राष्ट्रपति नियत्रंक- महालेखा परीक्षक की नियुक्त करता है।
राष्ट्रपति वित आयोगों के सदस्यों की नियुक्त करता हैं।
राष्ट्रपति संध लोक सेवा के आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्य की नियुक्त करता है।
राष्ट्रपति राज्य लोक सेवा के आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्य की नियुक्त करता है।
राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त,अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्त करता है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्त राष्ट्रपति करता है।
उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधिश की नियुक्त राष्ट्रपति करता है।
राष्ट्रीय महीला आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्त राष्ट्रपति करता है।
Articles of Indian Constitution
Attorney General of India Committees of Constituent Assembly
अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्षों तथा सदस्यों की नियुक्त राष्ट्रपति करता है।
राज्यों के राज्यपालों की नियुक्त राष्ट्रपति करता है।
राष्ट्रपति संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपालों या प्रशासकों की नियुक्त कर सकता है।
राष्ट्रपति सब नियुक्त मंत्रिपरिद के सलाह से करता है।
राष्ट्रपति को आयोगों की गठित करने की रक्तियॉ भी प्रदान की गयी है।
भारत के राज्यक्षेत्र में सामाजिक और शैक्षिणिक दृष्टि से पिछडे़ वर्ग की दशाओं का अन्वेण करने के लिए आयोग की गठन राष्ट्रपति करता है।
राजभाषा पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग का गठन राष्ट्रपति करता है।
राष्ट्रपति अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर रिपोर्ट देने के लिए तथा राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण सबधी क्रियाकलापो पर रिपोर्ट देने के लिए आयोग का गठन कर सकता है।
संध में रक्षा बलों का समादेश राष्ट्रपति में निहित होता है।
राष्ट्रपति रक्षा बलों का प्रमुख होता है।
राष्ट्रपति रक्षा बलों के प्रमुखों को भी नियुक्त करता है।
अन्य देशों के साथ भारत का सव्यवहार राष्ट्रपति के नाम से किया जाता है।
अन्तराष्ट्रीय मामलों में राष्ट्रपति भारत का प्रतिनिधित्व करता है।
अन्य देशों में भेजे जाने वाले राजदूत तथा उच्चायुक्त राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किये जाते है।
अन्य देशों से भारत में नियुक्त पर आने वाले रातदूतो व उच्चायुक्तों का स्वागत भी राष्ट्रपति द्वारा ही किया जाता है।
जब अन्य देश के राजदूत या उच्चायुक्त भारत में नियुक्त होकर आते है, तो वे अपना प्रत्यक्ष पत्र (Credential Letter) राष्ट्रपति के समक्ष पेश करते है।
समस्त अन्तराष्ट्रीय करार और सन्धियॉ राष्ट्रपति के नाम से की जाती है।
राष्ट्रपति अपनी राजनयिक शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिद् की सलाह पर करता है।
राष्ट्रपति लोकसभा में आग्ल -भारतीय समुदाय के दो सदस्यों का नियुक्त कर सकता है।
राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है।
राष्ट्रपति संसद के सत्र को आहूत करता है लेकिन संसद के एक सत्र की अतिम बैठक और आग्रामी सत्र की प्रथम
बैठक के लिए नियत तारीख के बीच छ: माह का अतर नही होना चाहिए।
वह सदनों या किसी सदन का सत्रावसान कर सकता है तथा लोकसभा को विघटन कर सकता है।
राष्ट्रपति संसद के किसी एक सदन में या ससद के सयुक्त अधिवशेन में अभिभाषण कर सकता है।
राष्ट्रपति लोकसभा के प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात प्रथम सत्र के आरम्भ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में संसद के सयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है।
अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
जेवी वीटो का प्रयोग राष्ट्रपति (ज्ञानी जैल सिंह) ने 1986 में संसद द्धारा पारित भारतीय डाक (सशोधन) अधिनियम के सदंर्भ में किया है।
संविधान द्धारा राष्ट्रपति को तीन प्रकार की न्यायिक शक्तियॉ प्रदान की गयी है।
अनुच्छेद 124 के अनुसार राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्त करने की शक्ति है।
राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को एक उच्च नयायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानान्तरण कर सकता है।
6 अक्टूबर 1993 को ​ दिए एक निर्णय मे उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठम न्यायाधीश को ही देश का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाना चाहिए।
उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति के सबंध में राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की राय मानने के लिए बाध्य है।
राष्ट्रपति उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्त करता है।
अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को क्षमा तथा कुछ मामलों में दण्डादेश के निलम्बन,परिहार या लघुकरण की शक्ति प्रदान की गयी है।
अनुच्छेद 143 के अनुसार राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श का अधिकार प्रदान किया गया
राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्तियॉ प्रदान की गयी है।
राष्ट्रीय आपात घोषित करने की अनुच्छेद 352 में।
अनुच्छेद 356 में राज्यो में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर वहॉ आपातकाल घोषित करने की।
अनुच्छेद 360 में वित्तीय आपात घोषित करने की।
अनुच्छेद 361 द्धारा राष्ट्रपति को यह विशेषाधिकार प्रदान किया गया है।

Concurrent List Committees of Constituent Assembly Drafting Committee
First Cabinet of Independent India Fundamental Rights Interim Government
List of UPSC Chairman National Commission and Concerned Ministries National Commission for Backward Classes
National Commission for Scheduled Castes Chairman National Symbol President
Provinvial Governments Sources of Constitution State Subject List
Table of Precedence Trade Union Union List